उत्तराखंडराजनीति

संगठन सर्वोपरि, सेवा मेरी प्राथमिकता: डॉ नीरज पंत

विशेष बातचीत : “जागेश्वर को पलायन नहीं, वापसी की पहचान बनाना है” — डॉ नीरज पंत

युवा नेतृत्व, संगठनात्मक अनुभव और डेटा आधारित विकास को लेकर डॉ नीरज पंत ने रखी अपनी बात

जागेश्वर। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर जागेश्वर क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज होती जा रही हैं। इसी बीच युवा नेतृत्व, संगठनात्मक अनुभव और तकनीक आधारित विकास की सोच को लेकर सक्रिय डॉ नीरज पंत ने क्षेत्र के विकास को लेकर अपनी प्राथमिकताओं और राजनीतिक दृष्टिकोण पर खुलकर बात की।

हिंदवी तरंगिनी के संवाददाता रजत वर्षिष्ट ने नीरज पंत से विशेष बातचीत की। बातचीत के दौरान युवा नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों, सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन, तकनीक के उपयोग, भाजपा में टिकट की दावेदारी और जागेश्वर के भविष्य को लेकर डॉ नीरज पंत ने विस्तार से अपनी बात रखी।

युवा होने को अनुभव की कमी से जोड़ना उचित नहीं : डॉ नीरज पंत

रजत वर्षिष्ट, संवाददाता: आलोचकों का कहना है कि डॉ नीरज पंत अभी युवा हैं और प्रशासनिक अनुभव भी सीमित है। इस पर आपका क्या कहना है?

डॉ नीरज पंत: उम्र अनुभव का एकमात्र पैमाना नहीं हो सकती। किसी व्यक्ति की क्षमता का आकलन उसके काम और परिणामों से होना चाहिए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं युवा नेतृत्व का उदाहरण हैं और उन्होंने यह साबित किया है कि युवा नेतृत्व दृढ़ निर्णय लेने और प्रभावी ढंग से काम करने में सक्षम है।

डॉ नीरज पंत ने कहा कि उन्होंने प्रदेश स्तर पर संगठन के साथ काम किया है और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के साथ संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाई हैं। वैज्ञानिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे उन्हें आंकड़ों के आधार पर परिस्थितियों का विश्लेषण कर निर्णय लेने की दृष्टि मिली है।

उन्होंने कहा, “सवाल यह नहीं होना चाहिए कि किसी व्यक्ति के पास कितने वर्षों का अनुभव है, बल्कि यह होना चाहिए कि उस अनुभव से जनता को क्या परिणाम मिले। अनुभव का मूल्यांकन वर्षों से नहीं, परिणामों से किया जाना चाहिए।”

योजनाओं का असर जमीन पर दिखना जरूरी : डॉ नीरज पंत

रजत वर्षिष्ट: विपक्ष का आरोप है कि सरकार की कई योजनाएं कागजों तक सीमित हैं। आप इसे किस तरह देखते हैं?

डॉ नीरज पंत: विपक्ष को सवाल पूछने का पूरा अधिकार है, लेकिन सवाल सभी से होने चाहिए। दशकों तक सत्ता में रहे राजनीतिक दलों से भी जनता को पूछना चाहिए कि उनके कार्यकाल में कितने गांवों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचीं और कितने लोगों को सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ मिला।

डॉ नीरज पंत ने कहा कि आज सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ी है और पात्र लाभार्थियों तक सहायता सीधे पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि किसी योजना का बनना ही पर्याप्त नहीं है।

“योजना तभी सफल मानी जाएगी, जब उसका असर जमीन पर दिखाई दे। जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी केवल योजना की घोषणा तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसकी निगरानी और जनता तक उसके वास्तविक लाभ की सुनिश्चितता भी उसकी जिम्मेदारी है,” डॉ नीरज पंत ने कहा।

आंकड़ों के आधार पर तैयार होगा जागेश्वर का विकास रोडमैप

रजत वर्षिष्ट: चुनावी अभियान और क्षेत्रीय विकास में तकनीक की भूमिका को आप किस तरह देखते हैं?

डॉ नीरज पंत: आज तकनीक केवल सुविधा का माध्यम नहीं, बल्कि बेहतर प्रशासन और बेहतर योजना का आधार बन सकती है। जागेश्वर के प्रत्येक गांव की आवश्यकताओं का व्यवस्थित डेटा तैयार करने की जरूरत है।

उन्होंने बताया कि परिवारों की संख्या, बच्चों की शिक्षा, पेयजल के स्रोत, सरकारी योजनाओं से वंचित पात्र परिवारों और स्थानीय आवश्यकताओं जैसी जानकारियों को व्यवस्थित रूप से दर्ज किया जा सकता है।

डॉ नीरज पंत के अनुसार, “यह केवल चुनावी आंकड़ों का संकलन नहीं होना चाहिए। हमारा उद्देश्य जागेश्वर का ऐसा विकास दस्तावेज तैयार करना है, जिसके आधार पर आने वाले वर्षों की प्राथमिकताएं तय की जा सकें। जब फैसले अनुमान से नहीं, आंकड़ों के आधार पर होंगे, तब विकास योजनाओं का प्रभाव भी अधिक स्पष्ट दिखाई देगा।”

“पहले कार्यकर्ता, दावेदार बाद में”

रजत वर्षिष्ट: भाजपा से टिकट की संभावनाओं और अपनी दावेदारी को लेकर डॉ नीरज पंत क्या कहना चाहेंगे?

डॉ नीरज पंत: मैं सबसे पहले पार्टी का कार्यकर्ता हूं और दावेदार बाद में। भारतीय जनता पार्टी में टिकट का निर्णय संगठन और पार्टी नेतृत्व करता है। मुझे नेतृत्व पर पूरा विश्वास है।

डॉ नीरज पंत ने कहा कि उनका ध्यान फिलहाल संगठनात्मक कार्य और जनता के बीच अपनी उपस्थिति मजबूत करने पर है।

“टिकट मिले या न मिले, जागेश्वर के प्रति मेरा काम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की नीतियों को जनता तक पहुंचाने का संकल्प जारी रहेगा। कार्यकर्ता का परिश्रम किसी टिकट का मोहताज नहीं होना चाहिए,” उन्होंने कहा।

“जागेश्वर को पलायन नहीं, वापसी के लिए जाना जाए”

रजत वर्षिष्ट: यदि आपको अगले पांच वर्षों के लिए जागेश्वर के विकास का रोडमैप तय करने का अवसर मिले, तो आपकी प्राथमिकता क्या होगी?

डॉ नीरज पंत: मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता जागेश्वर में ऐसे अवसर पैदा करना होगी, जिससे यहां के लोगों को रोजगार और बेहतर जीवन के लिए अपने गांव छोड़ने की मजबूरी न रहे।

उन्होंने कहा कि उनकी कल्पना ऐसे जागेश्वर की है, जहां युवा रोजगार की तलाश में बाहर जाने के बजाय अपने क्षेत्र में ही अवसर तलाश सकें और जो परिवार पहले पलायन कर चुके हैं, वे वापस लौटने के बारे में सोचें।

“मैं उस दिन को अपनी सफलता मानूंगा, जब देहरादून या दिल्ली में रहने वाला कोई परिवार अपने गांव लौटकर अपने घर का ताला खोले और कहे—अब यहीं रहना है। मेरा लक्ष्य जागेश्वर को पलायन के लिए नहीं, बल्कि वापसी के लिए पहचाने जाने वाला क्षेत्र बनाना है,” नीरज पंत ने कहा।

“जनता सवाल पूछे और हिसाब मांगे”

रजत वर्षिष्ट: जागेश्वर की जनता के लिए आपका अंतिम संदेश क्या है?

डॉ नीरज पंत: मैं जनता के बीच केवल वादों की सूची लेकर नहीं जाना चाहता। मेरी प्राथमिकता जनता के बीच रहना और उनकी समस्याओं को समझना है। जनता को जनप्रतिनिधि से सवाल पूछने और काम का हिसाब मांगने का पूरा अधिकार है।

डॉ नीरज पंत ने कहा, “जहां कमी दिखाई दे, वहां जनता मुझे भी टोक सकती है। मैं जागेश्वर की जनता से यही कहना चाहता हूं कि मुझे केवल समर्थन देने वाले व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने वाले प्रतिनिधि के रूप में देखें। मैं आपके बीच का हूं और आपके बीच रहकर ही काम करना चाहता हूं।”

— रजत वर्षिष्ट
संवाददाता, हिंदवी तरंगिनीइस संस्करण में मैंने “मैं पूछ रहा हूँ/मैं बता रहा हूँ” जैसी भाषा पूरी तरह हटाकर रजत वर्षिष्ट — संवाददाता और डॉ नीरज पंत के नाम को स्पष्ट रखा है, ताकि कॉपी सीधे अखबार के इंटरव्यू/विशेष बातचीत वाले पेज पर लगाई जा सके।

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